पाठ का अर्थ

 हिन्दी साहित्य में कुछ ऐसे मुस्लिम कवि हैं जो हिन्दी के उत्थान में अपूर्व योगदान दिये हैं। उन कवियों में रसखान का नाम की आदर के साथ लिया जाता है। रसखान सवैया छंद के प्रसिद्ध कवि थे। जितने सरस प्रहज, प्रवाहमय सवैये रसखान है, उतने शायद ही किसी अन्य हिन्दी कवि के हों। इनके सवैयो की मार्मिकता का आधार दृश्यों और वाह्ययांतर स्थितियों की योजना में है। रसखान सूफियों का हृदय लेकर कृष्ण की लीला पर काव्य रचते हैं। उनमें उल्लास, मादकता और उत्कटता का मणिकांचन संयोग है।

 

प्रस्तुत दोहे और सवैया में कवि कृष्ण के प्रति अटूट निष्ठा को व्यक्त किया है। राधा-कृष्ण के प्रेममय युगलरूप पर कवि के रसिक हृदय की रीझ व्यक्त होती है। पहले पद में कवि प्रेमरूपी वाटिका में प्रेमी और प्रेमिका का मिलन और उसके अंतर्मन में उठने वाले भावों को सजीवात्मक चित्रण किया है। माली और मालिन का रूपक देकर कृष्ण एवं राधा के प्रेमप्रवाह को तारतम्य बना दिया है। प्रेम का खजाना संजोने वाली राधा श्रीकृष्ण के रूपों पर वशीभूत है। एकबार मोहन का रूप देखने के बाद अन्य रूप की आसक्ति नहीं होती है। प्रेमिका चाहकर भी प्रेमी से अलग नहीं हो सकती है।

 

दूसरे पद में कवि श्रीकृष्ण के सन्निध्य में रहने के लिए सांसारिक वैभव की बात कौन कहें तीनों लोक की सुःख को त्याग देना चाहता है। ब्रज के कण-कण में श्रीकृष्ण का वास है। अतः वह ब्रज पर सर्वस्व अर्पण कर देना चाहता है।

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