कविता के साथ

 

Q 1. कविता में तीन उपस्थितियां हैं। स्पष्ट करें कि वे कौन-कौन सी हैं ?

उत्तर- प्रस्तुत कविता में प्रवेश, बोध और विकास तीन उपस्थितियाँ आयी हैं अक्षर ज्ञान की प्रक्रिया सबसे पहले प्रवेश की वातावरण में प्रारंभ हुई है। प्रवेश के संपूर्ण वातावरण को यहाँ तैयार किया गया है जहाँ अक्षर ज्ञान की रेखाएँ प्रारंभ से अंत तक सिमटती सिकुड़ती ’, ‘के चित्र अंकित करती हैं। उसके बाद बोध में कुछ परिपक्वता दिखाई पड़ने लगती है जहाँ अक्षर ज्ञान का एक सुदृढ़ वातावरण आता है जो मूल रूप में बोध कराता है और कौतूहल को जगाता है। अंत में विकास क्रम उपस्थित होता है जहाँ निरंतर आगे बढ़कर अक्षर का मूर्त रूप देने का प्रयास सफल होता है। यह एक सफलता है जहाँ से विकास-क्रम का सिलसिला पूर्णरूपेण जारी हो जाता है।

 

Q 2. कविता में का विवरण स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- प्रस्तुत कविता में कवयित्री छोटे बालक द्वारा प्रारम्भिक अक्षर-बोध को साकार रूप में चित्रित करते हुए कहती हैं कि को लिखने में अभ्यास पुस्तिका का चौखट छोटा पड़ जाता है। कर्म पथ भी इसी प्रकार प्रारंभ में फिसलन भरा होता है। को कबूतर मानकर प्रतीकात्मक रूप से अक्षर बोध कराने के सरलतम मार्ग का चित्रण है। साथ ही बालक की चंचलता कबूतर का फुदकना प्रकट करता है। इसी प्रकार की चर्चा में व्यापकता का भाव निहित है।

 

Q 3. खालिस बेचैनी किसकी है ? बेचैनी का क्या अभिप्राय है?

उत्तर- खालिस बेचैनी खरगोश की है। सीखकर सीखने के कर्म पथ पर अग्रसर होता हुआ साधक की जिज्ञासा बढ़ती है और वह आगे बढ़ने को बेचैन हो जाता है। खरगोश के माध्यम से सिखाया जाना बच्चा के लिए सरल है। साथ ही खरगोश की तरह चंचल एवं तेज होकर बालक अपनी सीखने की गति तेज करता है। आशा और विश्वास में वृद्धि होता है। बंचैनी का अभिप्राय है आगे बढ़ने की लालसा, जिज्ञासा एवं कर्म में उत्साह।

 

Q 4. बेटे के लिए क्या है और क्यों ?

उत्तर- बेटे के लिए उसको गोद में लेकर बैठने वाली माँ है। माँ स्नेह देती है, वात्सल्य प्रेम देती है। सीखने के क्रम में विफलता का मुँह देखता हुआ, कठिनाइयों का सामना करता हुआ जब बच्चा थके हुए अवस्था में आगे बढ़ता है तब माँ स्नेह की गोद में बिठाकर सांत्वना देती हुई आशा की किरण जगाती है। भी से लेकर तक सीखने के क्रम के बाद आता है। वहाँ स्थिरता आ जाती है, साधना क्रम रुक जाता है। ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार कर्मरत बालक माँ की गोद में स्थिर हो जाता है।

 

Q 5. बेटे को आँस कब आते हैं और क्यों ?

उत्तर- यहाँ संघर्षशीलता का चित्रण है। सीखने के क्रम में कठिनाइयों का सामना करते हुए बालक थक जाता है। से लेकर तक अनवरत सीखते हुए सीखने का प्रयास करना कठिन हो जाता है। यहाँ वह पहले-पहल विफल होता है और आँसू आ जाते हैं। कर्म पथ पर

या जीवन पथ पर जब बच्चा अग्रसर होता है और संघर्ष करते हुए, गिरते-उठते चलने का प्रयास करते हुए माँ के निकट जब आता है तब स्नेह का आश्रय पाकर, ममत्व के निकट होकर रो देता है।

 

Q 6. कविता के अंत में कवयित्री शायदअव्यय का क्यों प्रयोग करती है ? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- यह पूर्ण सत्य है कि प्रस्तुत कविता में अक्षर-ज्ञान की प्रारंभिक शिक्षण-प्रक्रिया एक चित्रात्मक शैली में की गई है। यह सृष्टि के विकासवाद का सूत्र उपस्थित करता है। सीखाने के क्रम में जो तीन उपस्थिलियाँ उत्पन्न हुई वे विकास का ही द्योतक है। यहाँ कविता के अंत में

 

कवियत्रीशायद अव्यय का प्रयोग करके यह स्पष्ट करना चाहती है कि जो अक्षर-ज्ञान में बच्चों को मसक्कत करना पड़ता है वही मसक्कत सृष्टि के विकास में करना पड़ा होगा। शायद सृष्टि का प्रारंभिक कर्म गति से चला होगा।

 

Q 7. कविता किस तरह एक सांत्वना और आशा जगाती है ? विचार करें।

उत्तर- कविता में एक प्रवाह है जो विवासवाद के प्रवाह का बोध कराता है। सांत्वना और आशा सफलता का मूल मंत्र है। विकास क्रम में व्यक्ति जब प्रवेश करता है तब उसे उत्थान-पतन के मार्ग से गुजरना पड़ता है। जैसे अक्षर-ज्ञान की प्रारंभिक शिक्षण-प्रक्रिया अति संघर्षशील होती है। लेकिन अक्षर ज्ञान करवाने वाली ममता की मूर्ति माँ सांत्वना और आशा का बोध कराते हुए शिशु को कोमलता प्रदान करती है और इसी कोमलता में शिशु का प्रयास सफलता के चरम सीमा पर स्थापित करता है।

 

Q 8. व्याख्या करें गमले-सा टूटता हुआ उसका घड़े-सा लुढ़कता हुआ उसका

उत्तर- प्रस्तुत व्याख्येय पक्तियाँ हमारी हिन्दी पाठ्य-पुस्तक के अक्षर-ज्ञानशीर्षक से उद्धृत है। प्रस्तुत अंश में हिन्दी साहित्यं के समसामयिक कवयित्री अनामिका ने अक्षर-ज्ञान की प्रारंभिक-शिक्षण प्रक्रिया में संघर्षशीलता का मार्मिक वर्णन किया है।

कवयित्री कहते हैं कि बच्चों को अक्षर-ज्ञान की प्रारंभिक शिक्षण प्रक्रिया कौतुकपूर्ण है। एक चित्रमय वातावरण में विफलताओं से जूझते हुए अनवरत प्रयासरत आशान्वित निरंतर आगे बढ़ते हुए बच्चे की कल्पना की गई है। को सीखना गमले की तरह नाजुक है जो टूट जाता है। साथ ही घड़े का प्रतीक है जिसे लिखने का प्रयास किया जाता है लेकिन लुढक जाता है अर्थात् गमले की ध्वनि से बच्चा सीखता है और घडेकी ध्वनि से सीखता है।

 

Q 9. ‘अक्षर-ज्ञान कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखें।

उत्तर- समकालीन कवियत्री अनामिका ने अक्षर-ज्ञानशीर्षक कविता में अक्षर-ज्ञान कः प्रक्रिया उसमें आने वाली बाधाओं, हताशाओं और अन्ततः संघर्ष कर असफलता को सफलता में बदलने के संकल्प के साथ सृष्टि की विकास-कथा में मानव की संघर्ष-शक्ति को रेखांकित किया है।

 

कवयित्री कहती हैं कि माँ ने बेटे की चौखट या स्लेट देकर अक्षर-ज्ञान देना शुरू किया लेखन और ज्ञान प्राप्ति की प्रक्रिया का सरल और रोचक बनाने के लिए उसने कुछ संकेता प्रतीक दिए। बेटे को बताया-सं कबूतर, ‘से खरगोश, ‘से गमला और से घड, आदि। बेटे ने लिखना शुरू किया। कबूतर का ध्यान करने के कारण चौखट में न अँटा, ‘ख भी खरगोश की तरह फुदक गया। इसी प्रकार गमला के चक्कर में टूट गया और घडा के ध्यान में लुढ़क गया। लंकिन कठिनाई पैदा हुई को लेकर। माँ ने समझाया-और बिन्दु (.) उसकी गोद में बैठा बेटा। कोशिश शुरू हुई किन्तु सधता ही नहीं था। ब: कोशिश के बाद भी जब की मुश्किल हल न हुई हो तो बेटे की आँखों में आँसू आ : किन्तु ये आँसू को साधने के प्रयत्न छोड़ने के न थे, इन आँसुओं में को साधने का असफलता को धता बताने का संकल्प था।

 

इस कविता के माध्यम से सृष्टि-विकास-कथा को प्रस्तुत किया गया है। अक्षर-ज्ञान के क्रम __ में आने-वाली कठिनाइयाँ मानव-जीवन की कठिनाइयाँ हैं। मनुष्य जीवन-संघर्ष के शुरुआती दौर में डगमगाता है, लड़खड़ाता है, फिर भी चलता है। किन्तु कभी-कभी जीवन में ऐसे क्षण आत हैं जब आदमी बेहाल हो जाता है। उसकी आँखों में आँसू आ जाते हैं किन्तु मनुष्य हारता ना वह अपनी असफलता को सफलता में बदलने के लिए सन्निद्ध हो जाता है। ये आँसू ही सृष्टि-विकास-कथा के प्रथमाक्षर हैं अर्थात् संघर्ष ही मनुष्य की जिन्दगी की फितरत है। यही इस . कविता की भावना है, सार है।

 

भाषा की बात

 

Q 1. निम्नांकित भिन्नार्थक शब्दों के वाक्य-प्रयोग करते हुए अर्थ स्पष्ट करें-

चौखट-चोखट, बेटा-बाट, खालिस-खलासी, खलिश, थमना-थमकनो, थामना, सपना, साधना, साध, गोदी-गद्दी-गाद, कोशिश-कशिश, विफलता-विकलता।

उत्तर-

चौखट वह चौखट पर खड़ा है।

चोखट चोखट दूर गया।

बेटा वह राम का बेटा है।

बाट तुम किसकी बाट खोज रहे हो।

खालिस वह खालिस बेचैनी में है।

खलासी बस का खलासी भाग गया है।

खलिश उसके खलिश का क्या कहना?

थमना उसका पैर थम गया।

थमकना पैर-थमकना अच्छी बात नहीं है।

थामना उसने ईश्वर का दामन थाम लिया।

सघना उसका काम सध गया।

साधना उसने अपनी साधना पूरी कर ली।

साध उसने अपना काम साध लिया।

गोदी शिशु माँ की गोद में बैठा है।

गादी वह गद्दी पर बैठा है।

गाद कड़ाही में गाद बैठा हुआ है।

कोशिश उसने भरपूर कोशिश नहीं की।

कशिश उसकी कशिश देखने में बनती है।

विफलता मुझे इस काम में विफलता मिली है।

विकलता उसकी विकलता बढ़ गई।

 

Q 2. कविता में प्रयुक्त क्रियापदों का चयन करते हुए उनसे स्वतंत्र वाक्य बनाएँ।

उत्तर-

अँटता यह बक्सा चौखट में नहीं अँटता है।

फुदक चिड़ियाँ फुदकती है।

उतरना बंदर पंड़ से उतरता है।

लुढकता गेंद लुढ़कता है।

सघता उससे यह नहीं सधता है।

मानता वह अपने गुरू को भगवान मानता है।

छलक. आँसू छलक पड़े।

 

Q 3. निम्नांकित के विपरीतार्थक शब्द दें :

बेटा, कबूतर, माँ, उतरना, टूटना, बेचैनी, अनवरत, आँसू, विफलता, प्रथमाक्षर, विकास-कथा, सृष्टि।।

उत्तर-

बेटा बेटी

कबुतर कबूतरी

मा बाप

उतरना -चढ़ना

टूटना बचना

बंदैनी शान्ति

अनवरत यदा-कदा

आँसू हँसी

विफलता सफलता

प्रथमाक्षर अन्त्याक्षर

विकास कथा अंतकथा

सृष्टि प्रलय।

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