Q 1. कवि को वृक्ष बूढ़ा चौकीदार क्यों लगता था?

उत्तर- कवि एक वृक्ष के बहाने प्राचीन सभ्यतासंस्कृति एवं पर्यावरण की रक्षा की चर्चा की है। वृक्ष मनुष्यतापर्यावरण एवं सभ्यता की प्रहरी है। यह प्राचीन काल से मानव के लिए वरदान स्वरूप हैइसका पोषक हैरक्षक है। इन्हीं बातों का चिंतन करते हुए कवि को वृक्ष बूढा चौकीदार लगता था

 

Q 2. वृक्ष और कवि में क्या संवाद होता था?

उत्तर- कवि जब अपने घर कहीं बाहर से लौटता था तो सबसे पहले उसकी नजर घर के आगे स्थिर खड़ा एक पुराना वृक्ष पर पड़ती। उसे लगता मानो घर के आगे सुरक्षा प्रहरी खड़ा है। उसके निकट आने पर कवि को आभास होता मानो वृक्ष उससे पूछ रहा है कि तुम कौन हो?

कवि इसका उत्तर देता-मैं तुम्हारा दोस्त हूँ। इसी संवाद के साथ वह उसके निकट बैठकर भविष्य में आने वाले पर्यावरण संबंधी खतरों की अंदेशा करता है।

 

Q 3. कविता का समापन करते हुए कवि अपने किन अंदेशों का जिक्र करता है और क्यों?

उत्तर- कविता का समापन करते हुए कवि पर्यावरण एवं सभ्यता के प्रति संवेदनशील होकर चिंतन करता है। चिंतन करने में उसे मानवतापर्यावरण एवं सभ्यताराष्ट्रीयता के दुश्मन की झलक मिलती है। इसी का जिक्र करते हुए कवि कहते हैं कि हमें घर को विनाश करने वालों से सावधान रहना होगाशहर में विनाश होते हुए सभ्यता की रक्षा के लिए आगे आना होगा। अर्थात् कवि को अंदेशा है कि आज पर्यावरणहमारी प्राचीन सभ्यतामानवता तट के जानी दुश्मन समाज में तैयार हैं। अंदेशा इसलिए करता है क्योंकि आज लोगों की प्रवृत्ति वृक्षों को काटने की हो गई। सभ्यता के विपरीत कार्य करने की प्रवृत्ति बढ़ रही हैमानवता का ह्रास हो रहा है। ऐसी स्थिति में वृक्षों के प्रति मानवता के प्रति संवेदनशील हो कम दिखाई पड़ रहे हैं। यह चिंता का विषय है। यही कवि की आशंका का विषय है।

 

Q 4. घर शहर और देश के बाद कवि किन चीजों को बचाने की बात करता है और क्यों?

उत्तर- घरशहर और देश के बाद कवि नदियोंहवाभोजनजंगल एवं मनुष्य को बचाने की बात करता है क्योंकि नदियाँहवाअन्नफलफूल जीवनदायक हैं। इनकी रक्षा नहीं होगी तो मनुष्य के स्वास्थ्य की रक्षा नहीं हो सकती है। जंगल पर्यावरण का सुरक्षा कवच है। जंगल की रक्षा नहीं होने से प्राकृतिक असंतुलन की स्थिति उत्पन्न होगी। इन सबसे बढ़कर मनुष्य की रक्षा करनी होगी। मनुष्य में मनुष्यता कायम रहेमानवता का गुण निहित होइसकी सभ्यता बनी रहे। इसे असभ्य होने से बचाने की महती आवश्यकता है। साथ ही जंगल की तरह मानवीयता का कत्ल नहीं हो इसके लिए रक्षार्थ आगे आने की महती आवश्यकता है।

 

Q 5. कविता की प्रासंगिकता पर विचार करते हुए एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर- प्रस्तुत कविता में कवि बदलते हुए परिवेश में दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु जिस तरह प्रकृति का दोहन हो रहा है उससे लगता है कि सारी दुनिया प्रकृति का स्वतः शिकार हो जायेगा। वृक्षों की अंधाधुंध कटाईबढ़ती हुई जनसंख्यासमुद्र का जलस्तर ऊपर उठना ये सब इसके सूचक हैं। वृक्ष हमारे मित्र हैं फिर भी इसको निष्ठुरता से काटते जा रहे हैं। अतिवृष्टि अनावृष्टिमौसम का बदलता चक्र पर्यावरण संकट का संकेत कर रहे हैं। आज मानव आँख होते हुए भी अंधा हो गया है। कवि इस समस्या से बहुत चिन्तित है। उसे लगता है कि दुनिया जल्द ही समाप्त हो जायेगी। वृक्ष को काटना अपने आप को मृत्यु के गोद में झोंकना है। ठंडी छाव देने वाले वृक्ष मनुष्य की निष्ठुरता के कारण काटे जा रहे हैं। अंत में कवि कहना चाहता है कि यदि समय रहते इस समस्या से निजात पाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो जीव जगत समाप्त हो जायेंगे। मुडो प्रकृति की ओर का नारा मानव को समझना चाहिए।

 

Q 6. व्याख्या करें :

(क) दूर से ही ललकारताकौन ? / मैं जवाब देता, ‘दोस्त

(ख) बचाना है-जंगल को मरूस्थल हो जाने से / बचाना है-मनुष्य को जंगल हो जाने से।

उत्तर-

 (क) प्रस्तुत पंक्ति हिन्दी पाठ्य-पुस्तक के कुँवर नारायण रचित एक वृक्ष की हत्यापाठ से उद्धृत है। इसमें कवि ने एक वृक्ष को कटने से आहत होता है और इस पर चिंतन करते हुए पूरी पर्यावरण एवं मानवता पर खतरा की आशंका से आशंकित हो जाता है। इसमें अपनी संवेदना को कवि ने अभिव्यक्त किया है। प्रस्तुत व्याख्येय में कवि कहता है कि जब मैं अपने घर लौटा तो पाया कि मेरे घर के आगे प्रहरी के खड़ा वृक्ष को काट दिया गया है। उसकी याद करते हुए कवि कहते हैं कि वह घर के सामने अहर्निश खड़ा रहता था मानो वह गृहरक्षक हो। जब मैं बाहर से लौटता था उसे दूर से देखता था और मुझे प्रतीत होता था कि वृक्ष मुझसे पूछ रहा हैं कि तुम कौन होतब मैं बोल पड़ता था कि मैं तुम्हारा मित्र हूँ। इसमें वृक्ष और कवि के संवाद की प्रस्तुति है।

 

(ख) प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक के एक वृक्ष की हत्या’ पाठ से उद्धृत है। इसमें कवि भविष्य में आने वाले प्राकृतिक संकटमानवीयता पर खतरा एवं ह्रास होते सभ्यता की ओर ध्यानाकर्षण कराते हुए भावी आशंका को व्यक्त किये हैं। साथ ही इन सबकी रक्षा संरक्षण एवं विकास हेतु चिंतनशील होने पर बल दिया है।

 

प्रस्तुत व्याख्येय में कवि ने कहा है कि अगर हम इस अंधाधुंध विकास क्रम में विवेक से काम नहीं लेंगे तो वृक्ष कटते रहेंगे और भविष्य में जंगल मरुस्थल का रूप ले लेगा। साथ ही मानवता की सभ्यता की रक्षा के प्रति सचेत नहीं होंगे तो मानव भी जंगल का रूप ले सकता है।

 

मानवीयता पशुता में परिवर्तित हो सकता है। मानव दानवी प्रवृत्ति अपनाता दिख रहा है और इस बढ़ते प्रवृत्ति को रोकना आवश्यक होगा। कवि मानवीयता स्थापित करने हेतु चिंतनशील हैसभ्यता की सुरक्षा हेतु प्रयत्नशील होने की प्रेरणा दे रहे हैं। साथ ही पर्यावरण संरक्षण हेतु सजग करने की शिक्षा दे रहे हैं।

 

Q 7. कविता के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- वस्तुतः किसी भी कहानीकविता आदि का शीर्षक वह धुरी होता है जिसके इर्दगिर्द कथावस्तु घूमती रहती है। प्रस्तुत कविता का शीर्षक एक वृक्ष की हत्या के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं को सीख देने के लिए रखा गया है। वृक्ष पुराना होने पर भी पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाता है। उसके फलछाया अपने लिए नहीं औरों के लिए होता है। अपना दोस्त समझने वाला वृक्ष दूसरों के लिए सर्वस्व सुख समर्पण कर देता है। घरशहरराष्ट्र और दुनिया को बचाने से पहले वृक्ष को बचायें। बदलता हुआ मौसम चक्र विनाश का सूचक है। हमारा जीवन मरणयुवा-जरा आदि सभी प्रकृति के गोद में ही बीतता है फिर भी हम प्रकृति का दोहन करते जा रहे हैं। अतः उपयुक्त दृष्टान्तों से स्पष्ट होता है कि प्रस्तुत कहानी का शीर्षक सार्थक और समीचीन है।

 

Q 8. इस कविता में एक रूपक की रचना हुई है। रूपक क्या है और यहाँ उसका क्या स्वरूप है स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- जहाँ रूप और गुण की अत्यधिक समानता के कारण उपमेय में उपमान का आरोप कर अभेद स्थापित किया जाता है वहाँ रूपक होता है। इसमें साधारण धर्म और वाचक शब्द नहीं होते हैं। इस कविता में वही बूढ़ा चौकीदार वृक्ष रूपक है। यहाँ चौकीदार वृक्ष है। उपमान का आरोप कर अभेद स्थापित किया गया है।

 

Q 9. ‘एक वक्ष की हत्या कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखें।

उत्तर- इस कविता में कवि कुँवर नारायण ने एक वृक्ष के काटे जाने से उत्पन्न परिस्थितिपर्यावरण संरक्षण और मानव सभ्यता के विनाश की आशंका से उत्पन्न व्यथा का उल्लेख किया कवि वृक्ष की कथा से शुरू होकरघरशहरदेश और अंततः मानव के समक्ष उत्पन्न संकट तक आता है। चूंकि मनुष्य और वृक्ष का संबंध आदि काल से हैइसलिए वह वृक्ष से ही शुरू करता हुआ कहता है कि इस बार जो वह घर लौटा तो दरवाजे पर हमेशा चौकीदार की तरह तैनात रहनेवाला वृक्ष नहीं था। ठीक-जैसे चौकीदार सख्त शरीरझुर्रादार चेहराएक लम्बी-सी राइफल लिएफूल-पत्तीदार पगड़ी बाँधेपाँव में फटा-पुराना चरमराता जूता पहनेमजबूतधूप-वर्षा मेंखाकी वर्दी पहने और हर आनेवाले को ललकारता और फिर दोस्त’ सुनकर आने देता हैवैसे ही वह वृक्ष था-बहुत पुरानामजबूत तने वालाफटी छालें थी उसकी। जूते की तरह जड़ें फैली थींमटमैला रंग था और उसकी डालें राइफल की तरह लम्बी थीं। तने के ऊपर पत्तियाँपगड़ी जैसी फैली थीं। जाड़ागर्मी और बरसात में सीधा रहता था और रह-रह कर उसकी शाखाएँहवा बहने पर हरहराती थीं मानो आनेवाले सेपूछता हो कौन और फिर शान्त हो जाता था। शान्ति से बैठते थे हम सब। अच्छा लगता था।

 

लेकिन एक डर था। हुआ भी वही। गफलत हुई या नादानी कहें पेड़ कट गया। किन्तु यह सिलसिला रहा तो और भी बहुत कुछ होगा। अब सचेत रहना है। घर को बचाना होगा लूटेरों सेशहर को बचाना होगा हत्यारों सेदेश को बनाना होगा देश के दुश्मनों से। इतना ही नहीं खतरे और भी हैं। नदियों को नाला बनाने से बचाना होगाउसमें डाले जानेवाले कचरों और रसायनों को रोकना होगा। वृक्षों को काटने से जो हवा में धुआँ बढ़ता जा रहा हैउसे रोकना होगा और जमीन में रासायनिक उर्वरकों को डालने से रोकना ताकि अनाज जहर न बनें। दरअसलजंगल को रेगिस्तान नहीं बनने देना होगा। जंगल रेगिस्तान बने कि आफत आई। किन्तु सोचना होगा कि क्यों कर रहा है मनुष्य यह सबमनुष्य की सोच में जो खोट पैदा हो गयी हैजिससे ये समस्याएँ पैदा हुई हैं उस खोट को निकालना होगा। मनुष्य को जंगली बनने से रोकना होगाउसे सही अर्थों में मनुष्य बनाना होगातभी मानवता बचेगी।

 

भाषा की बात

 

Q 1. निम्नलिखित अव्ययों का वाक्यों में प्रयोग करें

अबकीहमेशालेकिनदूरदरअसलकहीं

उत्तर-

अबकी – अबकी समस्या गंभीर है।

हमेशा – हमेशा सत्य बोलना चाहिए।

लेकिन – वह आनेवाला था लेकिन नहीं आया।

दूरं – यहाँ से दूर नदी बहती है।

दरअसल – दरअसल ये बाते झूठी हैं।

कहीं – वह कहीं नहीं जायेगा।

 

Q 2. कविता से विशेषणों का चुनाव करते हुए उनके लिए स्वतंत्र विशेष्य पद दें।

उत्तर –

बूढा – चौकीदार

पुराने – चमड़े

खुरदरा – तना

सखी – डाल

फूल पत्तीदार – पगड़ी

फटा पुराना – जूता

ठंढी – छाँव

 

Q 3. निम्नांकित संज्ञा पदों का प्रकार बताते हुए वाक्य-प्रयोग करें: घरचौकीदारदरवाजाडालचमड़ापगड़ीबल-बूताबारिशवर्दीदोस्तपलछाँवअन्देशानादिरोजहरमरूस्थलजंगल।

उत्तर –

घर – जातिवाचक – घर बड़ा है।

चौकीदार – जातिवाचक – चौकीदार ईमानदार है।

दरवाजा – जातिवाचक – दरवाजा खोल दो।

डाल – जातिवाचक – वृक्ष के डाल टूट गये।

चमड़ा – जातिवाचक – चमड़ा सड़ गया।

पगड़ी – जातिवाचक – पगड़ी नई है।

बल-बूता – भाववाचक – अपने बल-बूते पर कार्य करो।

बारिश – जातिवाचक – बारिश हो रही है।

वर्दी – जातिवाचक – वर्दी नयी है।

दोस्त – जातिवाचक – दोस्त पुराना है।

पल – भाववाचक – एक-एक पल का सदुपयोग करो।

छाँव – भाववाचक – छाँव ठंढी है।

अन्देशा – भाववाचक – अन्देशा समाप्त हो गया।

नादिरों – जातिवाचक – नादिरों से बचना है।

जहर – जातिवाचक – उसने जहर पी लिया।

मरूस्थल – जातिवाचक मरूस्थल फैल रहा है।

जंगल – जातिवाचक – जंगल घना है।

 

Q 4. कविता में प्रयुक्त निम्नांकित पदों के कारक स्पष्ट करें चमड़ापाँवधूपसर्दीवर्दीअन्देशाशहरनदीखानामनुष्य।

उत्तर-

चमड़ा – सबंध कारक

पाँव – अधिकरण कारक

धूप – अधिकारण कारक

सर्दी – अधिकरण कारक

वर्दी – अधिकरण कारक

अन्देशा – अधिकरण कारक

शहर – कर्म कारक

नदी – कर्म कारक

खाना – कर्म कारक

मनुष्य – कर्म कारक

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