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पाठ का अर्थ भारतेन्दु युग के प्रतिनिधि कवि प्रेमधन जी हिन्दी साहित्य के प्रखर कवि है। ये काव्य और
पाठ का अर्थ भारतेन्दु युग के प्रतिनिधि कवि प्रेमधन जी हिन्दी साहित्य के प्रखर कवि है। ये काव्य और
पाठ का अर्थ हिन्दी साहित्य में कुछ ऐसे मुस्लिम कवि हैं जो हिन्दी के उत्थान में अपूर्व योगदान दिये हैं।
प्रस्तुत पाठ में लेखक महोदय ने जाति प्रथा के कारण समाज उत्पन्न रूढ़िवादिता एवं लोकतंत्र पर खतरा को चित्रित किया
सन् 1916 से 1922 के आसपास की काशी। पंचगंगा घाट स्थित बालाजी विश्वनाथ मंदिर . की ड्योढ़ी। ड्योढ़ी का नौबतखाना
सहसा मैं काफी गंभीर हो गया था, जैसा कि उस व्यक्ति की हो जाना चाहिए, जिस पर एक भारी दायित्व
दौड़ते हुए हम लोग एक पतली गली में घुस गए। इस गली से घर नजदीक पड़ता था। दूसरे रास्तों में
जिस लिपि में यह लेख छपा है, उसे नागरी या देवनागरी लिपि कहते हैं। करीब दो सदी पहले पहली बार
बच्चे कभी-कभी चक्कर में डाल देने वाले प्रश्न कर बैठते हैं। मेरी छोटी लड़की ने जब उस दिन पूछ.दिया कि
विष के दाँत शीर्षक कहानी के लेखक श्री नलिन विलोचन शर्मा हैं। उन्होंने अपने लेख में । सामंती मिजाज के